
खबर फैल चुकी है कि बशार उल असद दमिश्क छोड़कर चले गए हैं काबुल ने भी गिरने में 14 दिन लिए थे मगर दमिश्क तो 10वें दिन में फॉल होने पर आ गया है अगर शामी फोर्सेस लड़ने ही को तैयार नहीं तो ईरानियन अलकुश कमांडर्स क्या कर सकते हैं शाम में निस्फ सदी से कायम असद खानदान का इक्त आप खत्म समझे आखिरी लड़ाई इस 193 193 किमी की पट्टी पर अलविज लड़ेंगे लेकिन अगर रूस और ईरान दोनों ही एक बहुत बड़ी लेवरेज खत्म करने वाले हैं अभी तो पार्टी शुरू हुई है असल लड़ाई दमिश्क फॉल के बाद होगी बागी फोर्सेस कोई एक ग्रुप थोड़ा है ये 50 से ज्यादा छोटे-छोटे ग्रुप्स मिलकर बना हुआ बड़ा ग्रुप है और हर ग्रुप को इदार चाहिए लगता है अब शाम के पांच हिस्से कर दिए जाएंगे और सब अपने अपने तौर पर खुद मुख्तार हो इस सारे सिनेरियो में अमेरिका इसराइल सऊदी अरब और तुर्किया का एक ग्रेट प्लान धुंधला सा दिखाई दे रहा कैसे हैं दोस्तों मैं फैसल ड़ज शाम में बशार उल असद दौर असद फैमिली का 54 साल से 54 इयर्स से कायम इक्दर्म हो रहा है गैर मुसद इला है खबरें हैं कि शामी सद्र बशार उल असद दमिश्क छोड़कर कहीं महफूज मुकाम पर चले गए हैं गो के इसकी तस्दीक या तरदीप कुछ देर तक हो जाएगी अभी नहीं हो पाई मगर ऐसा जरूर है कि हुकूम इदार के दफा सीरियन ऑफिशल्स के जो ऑफिस थे वहां से अहल का छोड़कर भाग गए हैं और उनकी वीडियोस सोशल मीडिया पर वायरल है बागियों ने शामी शहरों में ब ल असद के मुजस्सम को तोड़ना फोड़ना और उनके वालिद के मुजस्समे शारुल असद के वालिद हाफ उल असद के मुजस्सम को घसीटना शुरू कर दिया है बागी फोर्सेस एम फ हाईवे पर तूफान की तरह आगे बढ़ती हुई अदलिब उसके मुफत अलीप और हमा के बाद अब हमस के दरवाजे पर पहुंच चुकी है जिस वक्त यह वीडियो रिकॉर्ड की जा रही है तो हमस घेरे में आ चुका है और किसी भी वक्त फॉल भी हो सकता है लेकिन यह सिर्फ हम अभी नॉर्थ से होने वाले अटैक की बात कर रहे हैं जबकि साउथ से जनूब से नीचे की तरफ से भी सीरियन फ्री आर्मी के कुछ सेक्शंस ने मुसल्ला बगावत शुरू कर दी है और एडवांस शुरू कर दिया है बशार उल असद के खिलाफ दारा से चलते हुए इस लश्कर ने जो दरअसल 50 मुख्तलिफ छोटे बड़े ग्रुप्स के 30000 के करीब सोल्जर्स हैं इस ग्रुप ने दमिश की तरफ ऊपर की तरफ जाना शुरू कर दिया है वो टाउन पर टाउन और शहर पर शहर कब्जे में लेते जा रहे हैं अब तक दमिश्क शहर की दीवार से वो बमुश्किल 2 किलोमीटर दूर एक मॉर्निंग वॉक के फासले पर पहुंच चुके हैं लगता है कि आखिरी लड़ाई अगर हुई तो दमिश के लिए ही थोड़ी बहुत होगी इन दो बागी फोर्सेस के इलावा दोस्तों यानी जो नॉर्थ से आ रही है और ये साउथ से जो आ रही है इन दो बागी फोर्सेस के ग्रुप्स के अलावा इसराइल ने भी गोला हाइट्स से अपने तौर पर बशार उल असद र जीम के खिलाफ हमले शुरू कर दिए हैं मतलब शामी सद्र जिंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल में अब फस चुके हैं और वो तन्हा भी है ईरान और रशिया उस तरह उनके साथ नहीं है जैसे 2015 के बाद से थे आप इस नक्शे को एक बार फिर गौर से देखें तो आप समझ जाएंगे कि शामी सद्र बशार उल असद और उनके इंटरनेशनल सपोर्टर्स ईरान हिजबुल्ला और रशिया दरअसल किस मुश्किल में आ गए हैं बशार उल असद हुकूमत की लाइफलाइन साथियों उनकी ट्रेड और पावर हाउस यह सब कुछ इस 193 193 किमी की कोस्टल लाइन पर है यहीं पर असद फैमिली के खानदान कबीले और अलवी के जो सपोर्टर्स हैं उनकी आबादी सबसे ज्यादा है अलविज की तादाद यहां सबसे ज्यादा है इसी जगह पर रूस की तीन मिलिट्री बेसस हैं तूस में एक नेवल बेस है इससे कुछ ऊपर एक हेलीकॉप्टर बेस है और इंतही नॉर्थ में ताकि के करीब एयर बेस है इस कोस्टल लाइन पर शाम के पास रशियन डिफेंस सिस्टम भी इंस्टॉल्ड है मतलब यहां का डिफेंस काफी बेहतर है तो ये इतना अहम हिस्सा है अलविज के लिए बशार उल असद के लिए मगर याया तहरीर शाम जो अलकायदा और दाश से निकली हुई एक जमात है जिसे तुर्की इसराइल यूक्रेन और अमेरिका स्पोर्ट कर रहे हैं यह तेजी से मैदान मारती हुई हम शहर के दरवाजे पर तो आ गई है अब याद रखें कि यह भी एक ग्रुप ऑफ ऑर्गेनाइजेशन नहीं है हया तहर शाम एक वन ऑर्गेनाइजेशन नहीं है इसमें दर्जनों दूसरी तंजीम हैं सो क्या है कि अगर किसी भी लम्हे इस फोर्स और इसकी इति हादी सीरियन नेशनल आर्मी जो कि र्किश बैक्ड है इसके ग्रुप में से एक आर्मी इनका कब्जा हमस पर हो जाता है तो समझें कि बशार उल असद हुकूमत की ईरान और रशिया की अरब ग्रेट गेम में बहुत बड़ी शिकस्त हो गई ऐसी शिकस्त जिस से रिकवर करना इनके लिए बेहद मुश्किल होगा क्योंकि हमस पर कब्जा होते ही इन दोनों ताकतों की मदद से ईरान और सीरिया की मदद से शाम पर हुकूमत करने वाले बशार उल असद का कैंप दो अहम तरीन जगहों पर घेरे में आ जाएगा एक तो यही वेस्टर्न सीरिया जिसके भी हमने बात की 193 किमी की कोस्टल लाइन जहां अलविज बड़ी तादाद में रहते हैं यह घेरे में आ जाएगी यही सदर बशार उल असद का स्ट्रांग स्पोर्ट एरिया है हमस के बागियों के हाथ में चले जाने से इस हिस्से का दमिश्क से राबता ही कट जाएगा लेकिन यहां की आबादी के लिए कोस्टल लाइन के ट्रेड रूट की वजह से और रशियन मिलिट्री बेसिस की वजह से एक डिफेंस मौजूद रहेगा कि दो अतरा से घेरे जाने के बावजूद इनके पास एक अहम तरीन पोर्ट और डिफेंस तो होगा मतलब यह घेरे में तो आई होगी मगर यहां अलवी फैमिलीज के लिए और प्रेसिडेंट बशार उल असद अगर यहां पहुंच सके तो उनके लिए सुकून का सांस लेने की यहां पर जगह होगी मगर दूसरी जगह जहां बशार उल असद ज्यादा मुश्किल में है और जो अहम है वो कैपिटल दमिश्क है क्योंकि हमस के फॉल होते ही दमिश्क के पास कोई सप्लाई लाइन नहीं रहेगी खास तौर पर ऐसे में जब सामने से बागी फोर्सेस घेरा डाल चुकी हो ईस्ट से कोई महफूज रास्ता इसराइली बमबारी की वजह से बाकी ना बचा हो और साउथ से भी बागी सर पर चढ़ चुके हो आप देखिए कि जैसे ही बागियों ने नॉर्थ से या तहरी शाम और उनके थाद हों ने दमिश की तरफ नॉर्थ से मार्च शुरू किया था तो उसी वक्त ही साउथ से इसराइल बशार उल असद फोर्सेस पर और इराक से आने वाले रास्तों पर बमबारी कर रहा था उसने मकबूजा गोला हाइट्स पर और अपनी फोर्सेस की तादाद भी बढ़ा दी है इसराइली फोर्सेस शामी हुकूमत के अहम तरीन एयरपोर्ट्स और ट्रांसपोर्ट रूट्स को भी काट रही हैं यानी हमस के बाद हर तरफ से शामी सदर बशार उल असद की फोर्सेस बंद चुकी होंगी ऐसे में अगर बशार उल असद किसी बड़े और वाजे रशियन या ईरानी गवर्नमेंट की मदद से किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में ना बच सके तो इस ब्लडी सिविल वॉर का निशाना वह भी बन सकते हैं जैसा कि लीबिया में कर्नल कजा फी बन गए थे जिसके बाद आप जानते हैं कि वहां एक और कैस सामने आ ग जो अब तक उसी तरह तबाही फैला रहा है आप सोच रहे होंगे कि इस सारे घन चक्कर में बशार उल असद की अपनी फोर्सेस कहां है व डिफेंस क्यों नहीं कर रही दरअसल इस वक्त प्रेसिडेंट बशार उल असद की लॉयल फोर्सेस की तादाद बहुत ही कम रह गई है कभी यह 35 लाख के करीब होती थी लेकिन अब सवा लाख और एक लाख के दरमियान कहीं है इसमें से भी सिर्फ 25 से 3 हजार के करीब वो सोल्जर्स हैं जो दमिश्क में कैपिटल और बशार उल असद की हिफाजत के लिए हैं अगर उन्होंने की तो वो इसलिए कि इतनी कम तादाद इसलिए रह गई है कि बशार उल असद की जो फोर्सेस थी इनको तो कई माह से तनख्वाह ही नहीं मिली और वसाय भी इनके पास बहुत कम है और बागियों की तेज रफ्तार कामयाब हों के बायस ये डी मोरलाइज भी बहुत हो चुके हैं आप खुद देखें कि सिर्फ 10 दिन में बहुत ही छोटे से किनारे पर मौजूद वेस्टर्न किनारे पर मौजूद है तेरी शामने चार बड़े शहरों पर आनन फानन कब्जा कर लिया हाईवे फाइव को भी कंट्रोल में ले लिया और एक दुनिया को हैरान कर दि दिया इतनी जल्दी तो काबुल फॉल नहीं हुआ था उसे भी यकम अगस्त से 15 अगस्त तक तकरीबन 14 दिन लग गए थे मगर शामी फोर्सेस तो बागियों के सामने यूं भागी हैं जैसे वह लड़ना जानती ही नहीं ईरानी और रशियन फोर्सेस जो इनकी मदद के लिए मौजूद थी वह भी बेबस दिखाई दी है बल्कि ईरानी एनालिस्ट मेहदी रती के अल्फाज में अगर हम कहे तो शामी फोर्सेस जब खुद लड़ने को तैयार नहीं तो ईरानी अल कुद फोर्सेस उनके एडवाइजर मददगार और रशियन मददगार क्या कर सकते हैं खैर साथियों शामी फोर्सेस के इस तरह भाग जाने पर हम बागियों के पास जो बेहतरीन हथियार हैं मॉडर्न प्लानिंग है इक्विपमेंट है उसको हम नजरअंदाज नहीं कर रहे उनके पास डोनस हैं रात में लड़ने की ट्रेनिंग है शोल्डर माउंटेड रॉकेट लॉन्चर्स हैं मैन पैड्स हैं कुछ जगहों पर अमेरिकन एमवीज भी उनके पास है और रेबल की महबूब गाड़ी जो टा है उस पर माउंट की हुई मशीन गंस अलग से हैं और सबसे अहम बात ये है कि इन्हें सीरियन आबादी की बहुत बड़ी तादाद जो कि सुन्नी आबादी है उसकी स्पोर्ट भी हासिल है वो कैसे वो ऐसे साथियों कि आप जानते हैं प्रेसिडेंट बशार उल असद अलवी फिरके से ताल्लुक रखते हैं जो कि शिया इस्लाम की एक जेली शाख है गो के असना श्री शिया इस्लाम से अलवी फिरका काफी मुख्तलिफ है इनके अकाद और इनकी इबादत उनसे काफी मुख्तलिफ है लेकिन फिर भी इनका तारीखी ताल्लुक इसी सेक्ट से है अरबों में कबाइली और सेक्टे लॉयल्टी आज भी बहुत गहरी है यही वजह है कि अरब मुमा की ज्यादातर अवाज बन ही नहीं पाती क्योंकि फौज तो तभी बनती है जब फौज खुद एक फिरका एक सेक्ट बन जाए जबकि अरबों में तो ज्यादातर कबाइली वफादार यां किसी भी इदार के डिसिप्लिन से ज्यादा मजबूत ही रहती हैं सो उनकी फौज नहीं बन पाती तो खैर हम कह रहे थे कि बागियों को शाम में आवामी स्पोर्ट इतनी ज्यादा क्यों है दरअसल शाम में अलवी सेक्ट के लोगों की तादाद महज 10 से 15 फीसद है जिसके मुकाबले में 70 से 80 फीसद के करीब तो वहां सुन्नी आबादी है मगर 1970 से 1970 से जब हाफ ल असद ने बास पार्टी का तख्ता उलट करर एक मिलिट्री इंकलाब बरपा किया था तब से यह माइनॉरिटी आबादी अलवी आबादी जो है इससे ताल्लुक रखने वाले लोग ही मेजॉरिटी सुन्नी आबादी पर हुक्मरान कर रहे हैं और यही बात इस झगड़े का एक बहुत अहम पॉइंट है हां ये अलग बात है कि फर्स्ट एंड सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद जब ये सारे बंटवारे हुए फ्रेंच और अंग्रेजों ने आपस में ये सारी जमीने बांटी तो अलविज बेहतर तालीम याफ्ता होने और फौज में ब्यूरोक्रेसी में अहम पोजीशंस पर होने की वजह से आसानी से शाम का कंट्रोल अपने पास रख पाए फ्रेंच केस में कुछ कंस्पिरेशन भी थी डिवाइड और रूल के मुताबिक फिर अलविज मजीद ताकतवर उस वक्त हुए जब इनके ईस्ट में मशरिक में ईरान में आयतुल्लाह खुमैनी का मजहबी इंकलाब कामयाब हो गया इस इंकलाब में चूंकि शामी डिक्टेटर हाफिज उल असद की मदद भी शामिल थी इसलिए ईरानी इंकलाबी शिया रेजीम अखलाकी तौर पर हाफिज उल असद फैमिली की शामी हुक्मरान फैमिली की कर्जदार भी हो गई और इसके साथ जुड़ गई स्ट्रेटेजिक मुफ द इसके अलावा इनके सामने थे और यह एलायंस आज तक किसी ना किसी सूरत में कायम है तीसरी ताकत की स्पोर्ट शामी सद्र हाफिज उल असद को यानी अलविज को इस वजह से भी मिली कि शुरू में यह सब लोग जिस सेसज बाद में थे वह बास पार्टी थी और इसी के नाम पर इन्होंने हकूमत की यह एक सोशलिस्ट पार्टी थी और सो कॉल्ड कम्युनिस्ट आइडियो जीी पर कायम थी इसी वजह से सोवियत रशिया उस दौर से कोल्ड वॉर के दौर से इनके साथ था तभी से शाम के अंदर रूसी असरो और सो पढता रहा जो कि आज तक किसी नाना किसी शक्ल में कायम है तो यह वो दोस्तों अलायंस थे जिनकी वजह से अलविस जो कि 10 से 15 फीसद थे सिर्फ कुल आबादी के वो ताकतवर होते चले गए लेकिन मेजोरिटी सुन्नीस जो कि 70 से 80 फीसद के दरमियान आबादी रखते थे वो एहसास महरूम में रहे एहसास महरूम दरअसल यह था कि उन्हें उनकी आबादी के लिहाज से पावर शेयर नहीं दिया जा रहा था यह उनके दिल में एहसास था इस ग्रुप के इन्हीं जज्बात को माजी में भी मुख्तलिफ सख्त गीर ख्यालात की मजहबी जमां ने खूब इस्तेमाल किया है शाम की इख्वान उल मुस्लिमीन जो थी इवान मुस्लिमीन का जो सीरियन चैप्टर था उसने तो 80 की दई में 80 में हाफिज उल असद के खिलाफ बगावत कर दी थी जिसका सबसे बड़ा सानेहा हमा शहर में फिर हुआ इसी बगावत को कुचलने के लिए प्रेसिडेंट हाफिज उल असद ने 1982 में 1982 में अपने भाई रिफल असद की कयादत में एक फौज भेजी थी और उसने पूरे हमा शहर को यूं मलिया मेंट कर दिया था जैसे अभी इसराइल ने गजा को कर रखा है 2 फरवरी से 28 फरवरी तक 27 दिन के लिए हमा शहर का मुसरा करके इस पर बारूद फेंका गया 40000 के करीब कुल हलाक दें इन 27 दिनों में हो गई थी जिनमें से ज्यादातर हमा शहर के अंदर के लोगों की हलाक दें थी 177000 लोग आज तक मिसिंग हैं ना जाने मलबे तले दब गए या क्या हुए कोई नहीं जानता 79 मसाजिद तीन चर्चस और अनगिनत इमारतें भी इस दौरान इस बगावत को कुचलने के लिए गिरा दी गई एक लाख लोगों को शहर छोड़कर चले जाने पर मजबूर कर दिया गया यानी बगावत पू तरह कुचल कर रख दी गई अब यह सब कुछ भले इख्वान उल मुस्लिमीन के साथ हो रहा था मतलब उनके नाम पर हमा शहर की आबादी के साथ हो रहा था मगर तमाम सुन्नी आबादी सीरिया की जो थी वह इसको इनसे अपने आपको को मुंस समझती थी आप जानते हैं कि फिरका वराना तौर पर और फिरका वराना बुनियाद पर लोग मजहबी ख्यालात रखने वाले लोग इसी तरह सीरिया में सोचते हैं तो बहरहाल यह वाकया और सारी तफसील सिर्फ यह बताने के लिए थी कि शाम में बशार उल असद के खिलाफ बागियों को जो एक कामयाब यां अचानक से मिलना शुरू हुई है और बहुत रफ्तार से मिली है इनके पीछे एक हकीकत यह है कि बागी ग्रुप्स के फाइटर्स को एक सेक्ट की मदद हासिल है सुन्नी सेक्ट की क्योंकि वो उसी सेक्ट से हैं इसे शाम की मेजोरिटी आबादी की स्पोर्ट आप कह सकते हैं हमा शहर के बागियों के कब्जे में जाने के बाद आपने जो सड़कों पर खुशी के चंद मनाजर देखे तो उसके पीछे यही तारीख थी जिसका एक मुख्तसर हिस्सा हमने आपके सामने रखा यही वजह है कि तहरीर शाम के साथ फिलहाल आपको शाम की सेंट्रल और साउथ की आबादी नजर आ रही है लेकिन क्या बशार उल असद को गिराने के बाद दमिश्क पर कब्जा करने के बाद यह तमाम बजहर जो एक फिरके की वजह से यकजहती सबसे बड़ा कंट्रोल्ड एरिया जो नॉर्थ ईस्ट में है यहां कुर्दिश फोर्सेस का कंट्रोल है सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस एसडीएफ का यह भी ज्यादातर सुन्नी ही है मतलब कुर्द की बड़ी तादाद सुन्नी मुस्लिम पर मुश्त मिल है लेकिन यह बड़ी तादाद तहरीर शाम के सुन्नियों के साथ हरगिज नहीं है बल्कि यह दोनों आपस में दुश्मन है अभी जहां जहां से भी ब शारुल असद की फोर्सेस फरार हो रही हैं और है त शाम भी वहां पर कंट्रोल नहीं कर पा रही तो इन जगहों पर यही कुर्दिश फोर्सेस अपनी पोस्ट बना रही है वह अपना एरिया बढ़ाती जा रही हैं इन्हें अमेरिका और सऊदी अरब की सपोर्ट हासिल है जबकि तुर्की उनका दुश्मन है और तहरीर शाम का स्ट्रेटेजिक इतहाद है सो मेजोरिटी सुन्नी सेक्ट में सबसे बड़े यह दो ग्रुप्स हैं ध शाम और कुर्त लेकिन इन दो के अलावा और भी दर्जनों छोटे-छोटे बहुत से सुन्नी ग्रुप्स हैं जो के इस वजह से फिलहाल अलवी इस के खिलाफ तो मुहित है मगर इनकी जुबान कबाइली ग्रोह बंदी असब फिरके की निस्बत कहीं ज्यादा मजबूत है इसलिए वो एक सेक्ट का होने के बावजूद ना तो तहरीर शाम के साथ है और ना ही गुर्दों के साथ इन दो के अलावा जो बाकी ग्रुप्स है उनकी बात कर रहे हैं इनके अपने अपने ग्रुप्स और मकास है ये इतने ग्रुप्स हैं कि इन तमाम के नाम तक किसी को नहीं मालूम लेकिन अंदाजा है कि यह 50 60 के करीब है और तमाम के तमाम मुसल्ला है इनके पास हथियार है हर ग्रुप हर जगह अपने अपने मुफद और तहफ्फुज के लिए किसी ना किसी बड़े ग्रुप को आरजी तौर पर सपोर्ट कर रहा है इन छोटे ग्रुप्स में आप बहुत छोटी माइनॉरिटी आबादियों यानी क्रिश्चन जूज पारसी और दूस को भी शामिल कर ले जो अपने तहफ्फुज के लिए हर जगह अपना अलग-अलग फैसला कर रहे हैं मतलब एक मुश्किल सी खिचड़ी है ये जिसको हमने आपके सामने सादा अल्फाज में पेश करने की एक नक्शे पर कोशिश की है अच्छा अब इस सवाल की तरफ आते हैं कि क्या दमिश्क फॉल हो जाएगा या तहरीर शाम इस पर कब्जा कर लेंगी और अगर करती हैं तो प्रेसिडेंट बशार उल असद कहां जाएंगे अब साथियों यह तो वाजे है कि बशार उल असद का इक्त दार खत्म हो रहा है 54 साल से 54 इयर्स से पावर में रहने वाली असद फैमिली अब मजीद शाम के कम से कम मेजॉरिटी रीजन पर तो बिल्कुल हुकूमत नहीं कर सकती लगता है कि किसी भी लमहे इन्ह दमिश्क भी छोड़ना ही पड़ेगा जिसके बाद इनका ठिकाना न मुमकिन है कि वेस्टर्न कोस्टल साइड पर शाम का साहिली इलाका हो जैसा कि हम आपको नक्शे में दिखा चुके हैं क्योंकि यही इनकी स्ट्रांग स्पोर्ट बेस है फिर इसी जगह लिबनाइस की मदद भी कर सकती हैं अगर उन्हें जरूरत हो तो तो अगर बशार उल असद दमिश्क में शिकस्त खाते भी हैं तो व इस छोटे से 193 किमी लंबाई के रीजन में तुर्किया के जनूब में आ सकते हैं और यहां पना ले सकते हैं अगर वह यहां तक आ सके तो यानी अलविज शरल असद का जो कबीला और उसका ग्रुप है यह इस ग्रेट गेम में शाम की ग्रेट गेम में हरगिज आउट नहीं होगा चाहे यह दमिश्क से हार भी जाए इनके स्ट्रांग एरियाज में इन्हें शिकस्त देने की सलाहियत फिलहाल तो ये जितने भी बागी ग्रुप्स 50 60 के करीब है इनमें से किसी में हिम्मत नहीं है अगर किसी बैरून ताकत ने इनमें से किसी ग्रुप या ग्रुप्स की मदद करके यह एरिया अलवी से छीनने की कोशिश की तो एक ब्लड बाथ आपको देखने को मिलेगा क्योंकि दोनों तरफ फॉर्मिडियम हैं जो फिर यहां पर कम से कम आखिरी वक्त तक लड़ेंगे हम उम्मीद करते हैं कि ऐसा ना हो होप फुली ऐसा नहीं होगा क्योंकि इसका एक चांस भी है इसके पीछे एक लॉजिक भी है कि ऐसा ना हो वो क्या है क्यूरियस फेलोस वो इसलिए कि तुर्की जिसका पूरा मशर की शामी बॉर्डर सिर्फ शामी बॉर्डर की बात कर रहे हैं वो 65 फीसद पहले ही उसके दुश्मनों यानी कुर्द से भर चुका है उनके कंट्रोल में आ चुका है अब वो कभी नहीं चाहेगा कि उसका साउथ का बॉर्डर जहां अलविज की तादाद ज्यादा है वो भी उसके लिए हॉस्टाइल्स लिए दुश्मन बन जाएं क्योंकि अगर अलविज उसके दुश्मन बन जाते हैं तो तुर्किया के मौजूदा पुरम जनूबी बॉर्डर पर भी एक दुश्मन आ जाएगा तुर्की कभी नहीं चाहेगा कि उसका पूरा मिडिल ईस्टर्न बॉर्डर सवाय चंद शुमाली इलाकों के हॉस्टाइल्स में चला जाए सख सूसन जब उसके मुल्क में पहले से ही 2 मिलियन से ऊपर 20 लाख से ऊपर शामी महाजन हैं यह मुहाजिरीन टर्किश पॉलिटिकल सिस्टम में एक मसला बने हुए हैं उनकी इकॉनमी पर बहुत बड़ा बोझ है सो तुर्की अपनी ताकत से और बैरून मदद से पूरी कोशिश करेगा कि बशार उल असद को कोई सेफ पैसेज जरूर दे दिया जाए ताकि कम से कम वो अलवी के पूरे कबीले को ग्रोह को और सेक्ट को अपना दुश्मन ना बनाए और साउथ में अपने लिए अपने बॉर्डर पर एक मसला पैदा ना करें यहां एक और सवाल है वह यह कि अगर दमिश्क या पूरा सीरिया ईरान और रूस के असर से निकल जाता है तो इन दोनों ताकतों को क्या नुकसान होगा दोस्तों इस सारी ग्रेट गेम का ईरान और रूस पर बहुत बुरा असर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर तो जाहर है शाम के शहरिया पर पड़ेगा लेकिन इनके बाद इन दोनों मुल्कों पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा खास तौर पर ईरान जो पूरे मिडल ईस्ट में अपना मिलिट्री वेब फैला चुका है तो इस वेब की वेस्टर्न सप्लाई लाइन जो लेबनान तक जाती है वो कट जाएगी क्योंकि यह सप्लाई लाइन इराक और शाम के रास्ते से ही जाती है इससे यह होगा कि हिज्बुल्लाह हम मास और शाम में लड़ने वाले ईरानी फाइटर्स या ईरानी बैकड फाइटर्स ना तो असलहा और सैलरीज हासिल कर पाएंगे और ना ही इन्हें ईरानी मिलिट्री कमांडर्स के जरिए सूसी की और प्लानिंग में मदद मिल सकेगी ईरानियन आयतुल्लाह रेजीम के एंबीशंस के लिए यह कितना बड़ा नुकसान होगा इसका अंदाजा यूं लगाएं कि इस नई डेवलपमेंट से यह जो नई फतुहा की है बागियों ने इससे पहले तक शाम में 55 के करीब 55 के करीब ईरानी मिलिट्री बेसस थी ईरान की एक्सटर्नल मिलिट्री फोर्सेस में से अलकदू ऑपरेटिव्स और कमांडर्स शाम में ट्रेनिंग और एडवाइजरी पोजीशंस पर थे लेकिन पिछले दो-तीन दिन से ईरान ने सबको तेजी से यहां से शाम से निकालना शुरू कर दिया है इन्हें मशरिक में इराक की तरफ और मगरिब में वेस्ट में लेबनान की तरफ मूव किया जा रहा है यहां से इनमें से बहुत सों को सीरियन कोस्टल एरियाज में लता किया और तूस के करीब शिफ्ट किया जाएगा जो कि इनका स्ट्रांग बेस तो है आइंदा लड़ाई क्योंकि जो भी होनी है जैसा कि हम बता चुके ईरान ने या रूस ने या बशार उल असद के हाम हों ने अगर लड़ना है तो उसका सेंटर यही साहिली पट्टी होगी लेकिन इसके तमाम सप्लाई लाइंस तुर्की टर्किश बैक बागियों और साउथ में इसराइली हमलोगों की जद की वजह से कट चुकी होगी सिर्फ रशियन तैयार के जरिए जो यहां पर मदद पहुंचेगी वही पहुंचेगी क्योंकि रशियन तैयार को गिराने की हिम्मत ना इसराइल करेगा ना तुर्की और ना अमेरिका साथियों सारे सिनेरियो को अगर हम एक कदम पीछे होकर एक बड़े कैनवस में देखें तो एक बड़ी वाजे तस्वीर हमें नजर आती है क्योंकि अक्सर किसी बड़ी तस्वीर को देखने के लिए थोड़ा पीछे हटना पड़ता है करीब से किसी भी बड़ी तस्वीर को आप पूरा नहीं देख सकते तो हम इस अगर लड़ाई को थोड़ा पीछे हो कर देखें तो आपको इस ग्रेट गेम में अमेरिका इसराइल सऊदी अरब और तुर्किया का एक धुंधला सा बिग प्लान नजर आता है उसे समझ सकते हैं हो सकता है कि यह प्लान जिस तरह हम बताने लगे हैं उसी तरह ना हो लेकिन ऐसा जरूर है कि जो कुछ भी होगा उससे इन चारों ताकतों का एक बड़ा मसला हल हो जाएगा जो ये हल करना चाहते हैं सो ये सो कॉल्ड प्लान यह लगता है कि पहले मरहले पर सारे अरब खिता से ईरान के मिलिट्री वेब का यह बहुत बड़ा लिंक तोड़ दिया जाएगा जैसा कि शाम में फातम और जनब लिबनाइस की सप्लाई लाइनस कट जाएंगी फिर इराक में कताइब हिजबुल्ला बदर ऑर्गेनाइजेशन के लिए शाम और लि बनाम से जो हिजबुल्ला फाइटर्स फौरी पहुंच जाया करते थे वह भी नहीं पहुंच सकेंगे इसीलिए इन सब ईरानियन बैकड ग्रुप्स में शाम का लिंक आज तक सबसे अहम था आप नक्शे पर वाजे देख सकते हैं कि अगर मिडल ईस्ट चेस बोर्ड में शाम के खाने से ईरान को निकाल दिया जाए तो खुद बखुदा कम से कम इन तीन जगहों से लिबनाइस के बाद इराक और यमन दो ही अहम कड़ियां इसके पास रह जाएंगी जिसके बाद इसराइल से तुर्किया तर्ज पर शाम और लेबनान के साथ अमन कायम करके इसराइल के लिए रीजनल सिक्योरिटी की गारंटी दी जा सकती है जो कि अमेरिका और सऊदी अरब चाह रहे हैं तो यह प्लानिंग हो सकती है और यह भी हो सकता है कि हालात चूंकि इसी तरफ जा रहे हैं इसलिए तुर्की इसराइल और अमेरिका खामोशी से इसे होने दे रहे हैं और कहीं सहूल भी फाहम कर रहे हैं मतलब यह वाज तो उनका प्लान नहीं लेकिन चूंकि यह प्लान ये जो कुछ भी हो रहा है उनके फायदे में है तो वो उसको होने दे रहे हैं अगर दोस्तों बशार उल असद दमिश्क में हार जाते हैं तो समझे ईरान की तरह रूस भी शाम में असर खो देगा बड़े हिस्से में अगरचे उसकी तीन बेसस और पोर्ट उसके पास रहेंगी मगर जमीनी रास्ता तो उसके पास नहीं रहेगा सो रूस और ईरान को मुश्तरका तौर पर जल्द या बदर अपने मफा दत के लिए इकट्ठे होकर शाम में अपने लिए रास्ता खोलना पड़ेंगे लॉजिक यही कहती है वरना अमरिक फोर्सेस और उनके अड्डे तो शाम में मौजूद हैं फिर उनकी हामी हुकूमत भी कायम होने ही वाली है जैसा कि लग रहा है शाम के बड़े हिस्से में बहुत से लोग पूछते हैं कि क्या शाम में कभी अम्न कायम होगा इसका जवाब यह है कि जब तक पूरे शाम में बड़े-बड़े ग्रुप्स को अपने साइज के मुताबिक पावर शेयर नहीं मिलता और इस पावर शेयर पर वो राजी भी नहीं हो जाते यह लड़ाई खत्म होने वाली नहीं है अभी बजहर है और तहरीर शाम के झंडे तले एक बड़ा लव लश्कर बशार उल असद को गिराने के लिए नॉर्थ से तो आ पहुंचा है लेकिन यह एक हमलावरों का जत्था है कोई मुनज्जा सियासी बैक इसके पीछे हरगिज नहीं है कुमत किसने करनी है कैसे करनी है यह भी तय नहीं हुआ दमिश के फॉल पर इसके लिए एक और लड़ाई मुत वक्के है अनवांटेड लेकिन ऐसी लड़ाई हो सकती है यानी पार्टी तो अभी शुरू हुई है कुर्दिश फोर्सेस फ्री सीरियन आर्मी सीरियन फ्री आर्मी सीरियन डेमोक्रेटिक आर्मी सीरियन अरब आर्मी एसए और तहरीर शाम ये सब ब शारुल असद को गिराने के बाद ज्यादा से ज्यादा पावर शेयर चाहेंगे और इस पर ऐन मुमकिन है कि एक और खून रेज लड़ाई हो आई विश कभी ना हो अमेरिका इसराइल और तुर्किया जिनका मुफद इस वक्त तहरीर शाम की जीत में है वह उसको सपोर्ट कर रहे हैं और उसके साथ इसका अच्छा तासुर कायम करने के लिए भी सीएनएन और न्यूयॉर्क टाइम्स पर इनके लीडर अबू मोहम्मद अल जलानी के इंटरव्यूज भी पब्लिक कर रहे हैं वो दिखाना चाहते हैं कि दरअसल तहरीर शाम एक मॉडर्न फोर्स है इसके कमांडर्स एक मॉडर्न कमांडर्स हैं वह अलकायदा और दाश के साथ अपने ताल्लुक को बहुत पीछे छोड़ चुके हैं इस सॉफ्ट इमेज के लिए वेस्टर्न और टर्किश मीडिया यह प्रोपेगेंडा भी कर रहा है कि तहरीर शाम ने अदलिब और अलीप में क्रिश्चन शिया और दीगर माइनॉरिटी को तहफ्फुज दिया है जो चर्चस अदलिब में तहरीर शाम के स्ट्रांग होल्ड में तबाह हुए थे उन्हें भी इन्होंने दोबारा तामीर किया है मगर हकीकत यह है कि शाम के मौजूदा लीडर अबू मोहम्मद अल जोलानी उन पर इस वक्त भी 10 करोड़ डॉलर की हेड मनी है उनकी गिरफ्तारी या टारगेट करने पर 10 करोड़ डॉलर इनाम दिया जाएगा अमेरिका ये इनाम देगा और अमेरिकी इदार उनके इंटरव्यूज कर रहे हैं और पब्लिक कर रहे हैं वोह इस वक्त भी अमेरिका की नजर में अमेरिका ने उन्हें इंटरनेशनल स्पेशल टेररिस्ट डिक्लेयर किया हुआ है फिर उनके जो इंटरव्यूज आए हैं उनमें भी व वाज तौर पर एक मजहबी नजरिए पर कायम हुकूमत ही कायम करना चाह रहे हैं यानी शामी शहरिया के लिए इस नए इंकलाब में फिलहाल इतनी ही खबर है कि एक माइनॉरिटी और खौफ जदा हुकूमत बशार उल असद की हुकूमत जो अपने खौफ की वजह से मेजॉरिटी पर बहुत जुल्म बिठा रही थी उसकी जगह एक नई एंबिशियस लेकिन एक थियोक्रेटिक जिहादी फोर्स की हुकूमत आ गई है जो शुरू में तो अपने अच्छे इमेज के लिए बहुत कुछ कर रही है और यह भी बता रही है कि हम आपके सेक्ट से हैं और हम माइनॉरिटी का भी ख्याल रखेंगे ये सब कुछ हम जानते हैं कि इस तरह के इदार अक्सर उस वक्त करते हैं जब उन्हें आलमी ताकतों की हिमायत या मदद चाहिए होती है जैसा कि हम जानते हैं कि अफगान तालिबान भी तमाम वादे करके आए थे लेकिन फिर उन्होंने वही किया जो उनकी आइडियो है वहां खवातीन की आला तालीम पर पाबंदियां हैं बच्चियां स्कूल्स नहीं जा सकती पार्लर्स भी बंद हो रहे हैं बाजार में उनके आने पर मुश्किलात खड़ी की जा रही हैं हो सकता है कि वेस्टर्न पावर्स और तुर्किया बशार उल असद को गिराने के शौक में बहिरा रोम के मेडिटरेनियन के किनारे पर एक सख्त गीर अफगानिस्तान कायम कर बैठे साथियों हमने इस वीडियो में इसकी रिकॉर्डिंग के वक्त तक के ह कायक आपके सामने रखे हैं सूरते हाल तेजी से बदल रही है हो सकता है जब आप यह वीडियो देख रहे हो तो कुछ और शहरों पर भी कब्जा हो चुका हो सीरियन सिविल वॉर पर हम आपको मुसलसल अपडेट करते रहेंगे आप मिडिल ईस्ट में इस बेहद उलझी हुई गुथी की इंतहा दिलचस्प तारीखी कहानी समझने के लिए मुस्लिम कोल्ड वॉर की इन तीनों एक साथ को एक बार जरूर देखें आप जाएंगे कि आखिर मिडल ईस्ट में अरब दुनिया में और मुस्लिम दुनिया में इसके बड़े हिस्से में अमन कायम क्यों नहीं हो पा रहा और यह बाकी कमों की तरह तरक्की क्यों नहीं कर पा रहे
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