

[संगीत] कैसे हैं दोस्तों? मैं फैसल उच। न्यूयॉर्क शहर में जोहरान ममदानी ने 10 लाख36,000 वोट्स लेकर मेयरशिप का इलेक्शन जीत लिया है। इसने 50% से ज्यादा थोड़े से ज्यादा पॉपुलर वोट्स भी ले लिए हैं। मगर याद रहे कि इसके 8 लाख वोट्स इसी की पार्टी से ताल्लुक रखने वाले लेकिन आजाद उम्मीदवार ने तोड़े भी हैं। इस बेमिसाल जीत से युगंडा में पैदा होने वाला यह 34 साला इंडियन जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क की तारीख का 111वां मेयर मुंतखिब हुआ है। ऐसा मेयर जो अनअपोलजेटिकली मुस्लिम है, सोशलिस्ट है और एंटी इसराइली लॉबी है। बाकी सब पॉइंट्स के अलावा जो भी आएंगे पाकिस्तानियों को इस जीत से इस मरहले से यह सबक जरूर सीखना चाहिए कि डेमोक्रेसी 250 साल तक मुख्तलिफ नजरियात मुख्तलिफ जुबानों और मुख्तलिफ कौमों के लोगों को कामयाबी से इकट्ठा रख सकती है। उन्हें तरक्की दे सकती है। अगर डेमोक्रेसी ग्रास रूट लेवल तक कायम हो। डोनाल्ड ट्रंप जैसा खुदप्रस्त बिलियनियर भी इस सिस्टम में प्रेसिडेंट बन सकता है। दो बार बन सकता है और फिर सिर्फ एक साल में ही लोगों को अपनी गलती का अगर एहसास हो जाए तो उसकी ताकत बतदरीज कम होना भी शुरू हो सकती है। इसी सिस्टम में पाकिस्तान में लोग कहेंगे कि एक डेमोक्रेटिक सिस्टम है। भले है मगर ये एक हाइब्रिड सिस्टम में ढल चुका है। फिर इसमें दूसरा मसला यह है कि कोई भी जमात ग्रास रूट लेवल तक डेमोक्रेसी ले जाने के लिए तैयार नहीं। हालांकि लोकल इलेक्शंस ही वो नर्सरी है जहां वोट देने वालों और वोट लेने वालों दोनों की तरबियत होती है। अमेरिका में लिबरल्स की हद से बढ़ी हुई हमाकतों का भी सिस्टम ने अमेरिकन डेमोक्रेटिक सिस्टम ने ही जवाब दिया और डोनल्ड ट्रंप की शक्ल में सजा दी और डोन्ड ट्रंप की हद से बढ़ी हुई एक्सट्रीम राइट विंग गवर्नमेंट का जवाब भी इसी सिस्टम से जोहरान ममदानी की शक्ल में आया। तो पाकिस्तानियों एक अच्छा हमहंग मजबूत सिस्टम ही वो जगह हो सकती है जहां मजमुई तौर पर मुख्तलिफ किस्म के इंसान मुख्तलिफ ख्यालात के इंसान खुशहाल रह सके। एक शख्स एक मुल्ला की डिक्टेटरशिप या एक मजहब या एक रंग या एक जुबान के लोगों का एक जगह जमा होना बगैर किसी अच्छे सिस्टम के कोई जादू नहीं जगा सकता। कोई गारंटी नहीं कि यह लोग कामयाब और खुश रहेंगे। अमेरिकन डेमोक्रेटिक सिस्टम ने यह जादू आपके सामने दिखाया है। क्योंकि जोहरान ममदानी की जीत साबित कर रही है कि एक आजाद लिबरल डेमोक्रेसी में बाउंस बैक करने की कितनी सलाहियत होती है। पिछले एक साल में जिसने भी कभी मुझसे पूछा कि क्या अमेरिका तबाही की तरफ जा रहा है डोनल्ड ट्रंप की जीत और उसके एक्शंस देखते हुए तो मेरा जवाब होता था कि अमेरिकन डेमोक्रेसी बहुत सख्त जान है। इसमें यह सलाहियत है कि कोई ट्रंप जैसा भी आ जाए किसी रद्दे अमल में तो वह भी कोई ज्यादा तब्दीली नहीं ला सकता। जोहरान ममदानी की जीत एक आजाद सिस्टम की जीत है। सिर्फ एक फर्द की नहीं। लेकिन यह जीत इस डिसऑर्डर्ड वर्ल्ड में एक नई सिमत की तरफ भी इशारा कर रही है। ऐसी सिमत जिसमें नया ऑर्डर जाने कब तरतीब पाए मगर मिलनियल्स और जनरेशन जी की मेजोरिटी का रुख यह इलेक्शन वाज़ कर रहा है इसका रिजल्ट। इसी के सिग्नल्स तो न्यूयॉर्क कलेक्शन में हमें दिखाई दिए हैं और ऐन मुमकिन है कि अगर यह मेयर जोहरान मुमदानी शहर चलाने में भी अपने वादों के मुताबिक कामयाब हो जाता है तो फर्स्ट वर्ल्ड और उसके बाद फिर बाकी दुनिया में भी इसी से मिलते जुलते ट्रेंड्स चलेंगे क्योंकि जनरेशन जी और मिलेनियल्स इसको लीड कर रहे हैं और ऐसे ट्रेंड्स चलेंगे जिनमें ज्यादा से ज्यादा वर्किंग क्लास की सियासत पर बात और काम होगा ना कि आइडेंटिटी पॉलिटिक्स पर और एंटी वोटक्स जैसे बेईमानी नारों पर क्योंकि दुनिया आज वाकई एक बहुत बड़ा गांव और सारी इंसानियत एक खानदान बन चुकी है। यह हमेशा से थी। लेकिन अब यह सब नजर भी आता है। कहीं भी कोई बड़ी तब्दीली आइसोलेशन में नहीं आती। उसके असरात सब पर होते हैं और ना ही ये असरात आइसोलेटेड रिजल्ट्स लाते हैं। इसके रिजल्ट्स भी सभी को किसी ना किसी दर्जे में भुगतना पड़ते हैं। 34 ईयर जोहरान ममदानी में वो सब कुछ था जिसे अमेरिका में आज तक चैलेंज करना बहुत आसान था। वो मुसलमान था, वो इमीग्रेंट था, एंटी इसराइली लॉबी था, एंटी मागा मूवमेंट था। ऐलानिया डेमोक्रेट सोशलिस्ट था और बकल उसके नाकदीन के इंतहाई ना तजुर्बाकार खतरनाक हद तक ना तजुर्बाकार उसे कहा गया वो ये भी था ऐसे शख्स को पराया बना देना चुटकियों का काम था अमेरिका में और ये वही सब कुछ था जिस पर अमेरिका में सियासत तो क्या नौकरी तक करना नामुमकिन बना दिया जाता था इनमें से कोई भी बात किसी में निकल आए आप इसराइल की हिमायत अमेरिका में थोड़ी सी कम करें तो आप पर एंटीसेटिक होने का इल्जाम लग जाएगा और फिर सब कुछ छीन जाएगा ये था लेकिन जोहरान ममदानी ने डटकर नितन याू और इसरलीय लॉबीस की सख्त मुखालफत की बल्कि यह तक कहने से साफ इंकार कर दिया कि वो इलेक्शन जीतकर इसराइल का दौरा करेगा। ये मानने से इंकार कर दिया। उसने कहा मैं इसराइल क्यों जाऊं? हालांकि बाकी सब उम्मीदवार यही बोरिंग राग सबके सामने खड़े होकर अलाप रहे थे जब इनकी डिबेट हुई थी और तालियां पीटी जा रही थी। जैसे सब ने तलाबेब से कोई एक ही हमनुवाई कास्ट कोर्स कर रखा है और सोते जागते जब भी कोई खास राग चलता है तो ये सब एक खास सुर लगा देते हैं। ये सुरते हाल थी। इसके बाद अमेरिका में सोशलिस्ट होना इतनी बड़ी गाली थी कि कभी-कभी इस पर लोग इलेक्ट्रिक चेयर्स पर बिठाकर मार दिए जाते थे। आपको रोजबर्ग्स की कहानी याद होगी। हमने इस पर एक वीडियो बनाई थी जिसमें मियां बीवी को कत्ल कर दिया जाता है सजा के तौर पर क्योंकि वो सोशलिस्ट थे और उन पर न्यूक्लियर जासूसी का इल्जाम लगाया गया क्योंकि उन पर आसान था। फैज अहमद फैज की नज़्म हम जो तारीख राहों में मारे गए उन्हीं पर लिखी गई थी। मकार्थिज्म की पूरी मूवमेंट अमेरिका में सोशलिस्ट कम्युनिस्ट के खिलाफ चली थी। किसी के पास सुर्ख रंग की घड़ी भी पाई जाती। कोई किताब भी होती जिसका कवर सुर्ख था तो उसे गद्दार ठहरा दिया जाता था। नौकरी से निकाल दिया जाता था। जेल में ठोस दिया जाता था। यह ट्रेंड किसी ना किसी शक्ल में आज तक अमेरिका में जारी था। डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकनंस दोनों किसी भी ऐसे शख्स को फरी तौर पर रिजेक्ट कर देते थे सियासत से जिसके सोशलिस्ट होने का जरा सा भी इमकान होता था। इंतहाई मशहूर और हर दिल अजीज पॉलिटिशियन बर्नी सेंडर्स आप सब जानते हैं जो कि आजाद सेनेटर हैं। लेकिन डेमोक्रेट्स के साथ ही वो अपना अलायंस हमेशा रखते हैं। इन्हें दो मर्तबा डेमोक्रेट्स ने उम्मीदवार बनाने से इंकार कर दिया। हालांकि वो डेमोक्रेट्स प्रेसिडेंट की दौड़ में मकबूलियत के लिहाज से बहुत आगे थे। यंग पब्लिक यंग वोटर्स उनके साथ थे। वो वोटर्स चॉइस थे। अमेरिकन प्रेसिडेंट वो बन सकते थे। मगर दोनों बार उन्हें उठाकर बाहर फेंक दिया। उनकी अपनी अलायंस पार्टी ने। एक मर्तबा 2016 में जब हेली क्लिंटन को टिकट दे दिया और वो हार गई। दूसरी मर्तबा 2020 में जब जो बाइडन को टिकट दे दिया और जीत कर भी उसने वो जिल्लत कमाई कि डोनल्ड ट्रंप अब इ्तदार में आ गए। ये इतनी बड़ी हार थी कि इस इलेक्शन में उस इलेक्शन में डेमोक्रेट्स हाउस, सेनेट, गवर्नरशिप और स्पीकर रेस हर जगह से चंद महीनों में शिकस्त खा गए। सफाया ही हो गया। बर्नी सेंडर्स जो जीत का ज्यादा इमकान लिए हुए थे उन्हें मुस्तरद करने की डेमोक्रेट्स के नजदीक एक ही वजह थी कि वो सोशलिस्ट ख्यालात के करीब थे। बाय द वे यूके में भी यही हुआ कि जर्मनी कॉर्बन को लेबर पार्टी ने गिरा दिया क्योंकि उनके ख्यालात भी डेमोक्रेट सोशलिस्ट थे। इस सबसे मकबूल बर्तानवी सियासतदान पर घटिया इल्जामात लगाकर इन्हें सियासत से हमेशा के लिए आउट कर दिया गया और फिर इसकी कीमत भी लेबर पार्टी ने यूके में अदा की। मतलब डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन दोनों सोशलिस्ट उम्मीदवारों से दूर भागते थे, बेदकते थे इनसे। लेकिन जोहरान ममदानी तो ऐलानिया बार-बार कहता था कि वो सोशलिस्ट डेमोक्रेट है। यही वजह है कि उसे डेमोक्रेट्स की जानिब से जून में नॉमिनेशन मिल जाने के बाद भी टॉप डेमोक्रेट्स ने इंडोर्स नहीं किया। आखिर तक नहीं किया। जैसे शर्मसार हो रहे हो, शर्मिंदा हो रहे हो कि लोगों का रद्दे अमल पहले देख लेते हैं फिर कुछ करेंगे। डेमोक्रेट्स के सेनेट लीडर सेंटमेंट के टॉप लीडर और माइनॉरिटी लीडर चक शुमर ने आज तक उन्हें इंडोर्स नहीं किया और हाउस लीडर हकीम जाफरीज ने उन्हें आखिरी दिनों में आकर इंडोर्स किया। साबिक सदर डेमोक्रेट के अहम लीडर बराक ओबामा ने भी अभी चंद दिन पहले अपने एक हफ्ते से भी कम वक्त हुआ है ने इंडोर्समेंट दी थी और उस वक्त दी थी जब जोहरान की जीत हर सर्वे में यकीनी नजर आने लगी थी। इस सब के पीछे उसका खुद को ओपनली डेमोक्रेट सोशलिस्ट कहना और इसराइल पर कड़ी तनकीद करना था। बाय द वे जो लीडर्स और पॉलिटिशियंस लिबरल डेमोक्रेटिक वर्ल्ड में खुद को सोशलिस्ट कहते हैं। इसका मतलब यह हरगिज नहीं कि वो चाइना जैसी वन पार्टी सिस्टम चाहते हैं या वेनेजुएला जैसा या शुमाली कोरिया जैसा कोई निजाम चाहते हैं या अपने मुल्क को क्यूबा बनाना चाहते हैं। इनकी नई तारीफ इनके अपने मुताबिक यह है कि वो ऐसी डेमोक्रेसी चाहते हैं जिसमें ज्यादा से ज्यादा पब्लिक फंडिंग की जाए जिसमें सोशल वेलफेयर के लिए गवर्नमेंट ज्यादा फंड्स दे। रिहाइश ट्रांसपोर्ट और एजुकेशन में मुकम्मल या पहले से ज्यादा सब्सिडीज दी जाए, मदद की जाए। जैसा कि जोहरान ममदानी ने यह नारा लगाया इस मेयरशिप के लिए कि वो हर साल न्यूयॉर्क में जो रेंट्स जो किराए बढ़ जाते हैं घरों के टैक्सेस बढ़ जाते हैं उनको चार साल के लिए फ्रीज़ कर देगा। जितना किराया आज है चार साल तक उतना किराया ही रहेगा। ट्रांसपोर्ट फ्री करेगा और यूनिवर्सल चाइल्ड केयर भी वो देगा। यानी हर किसी को न्यूयॉर्क में चाइल्ड केयर अलाउंस मिलेगा। चाहे वो इमीग्रेंट हो उसी वक्त का या वो बोर्न सिटीजन हो। तो नए डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट जो हैं ये खुद को यहीं तक रखते हैं। वो वन पार्टी रूल या शिमाली कोरियन एक्सट्रीम्स तक नहीं जाना चाहते और ना ही वैसे आपको बताएं कि अब क्लासिकल सोशलिज्म कम्युनिज्म कभी वापस आ सकता है। क्योंकि क्लासिकल कम्युनिज्म अब खत्म हो चुका। हर आईडियोलॉजी की तरह यह भी वक्त के साथ अपग्रेड हुआ है। जिसमें बहुत सी डेमोक्रेटिक वैल्यू्यूज शामिल हुई हैं। जैसा कि डेमोक्रेसी में बहुत सी सोशलिस्ट वैल्यू्यूज भी शामिल हो चुकी हैं। बल्कि अगर मैं इनहीं जोहरान ममदानी के अल्फाज में कहूं तो वो क्या कहते हैं? वो ये कहते हैं कि बेटर डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ वेल्थ ये है उनका नाम सोशलिस्ट डेमोक्रेट से उनका मतलब बेटर डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ वेल्थ दौलत की जरा बेहतर तकसीम जो भी है उससे बेहतर। तो खैर हम बता रहे थे दोस्तों कि एंटी इसराइल और सोशलिस्ट होने के टैबूस ने भी जोहरान ममदानी का कुछ नहीं बिगाड़ा और इसके अलावा जोहरान का मुसलमान होना और इमीग्रेंट होना वो भी युगंडा से। यह भी इसके रास्ते की रुकावट नहीं बनाया जा सका इस सिस्टम में। एक तरफ जहां आप अमेरिका के फ्री पॉलिटिकल सिस्टम को दाद इस वक्त दें, वहीं इस तब्दीली को भी नोट करें कि यह कार्ड्स अब उतनी ताकत नहीं रखते जितना इनके होल्डर्स समझा करते थे। दिलचस्प बात यह है कि डेमोक्रेट्स ही का दूसरा आजाद उम्मीदवार एंड्र्यू कैमियोरान के मुकाबले में था जिसे रिपब्लिकनंस जी जान से आखिर में सपोर्ट करने लगे। इसे 26 अरबपतियों की सपोर्ट थी, मदद थी, फंडिंग थी और डोनाल्ड ट्रंप इसके हक में पोस्टें किया करते थे। एलॉन मस्क भी। यह खानदानी सियासतदान था जिसका बाप भी न्यूयॉर्क का गवर्नर रहा था। यह खुद भी न्यूयॉर्क का गवर्नर रहा था और मेयर भी रह चुका था। इसीलिए ममदानी ने अपनी फातिहाना तकरीर में कहा अभी जो उन्होंने की कि हमने एक डायनेस्टी को शिकस्त दी है। खानदान को शिकस्त दी है। जो कि सिर्फ इसकी नहीं इसके सपोर्टर्स की भी थी डायनेस्टी जो इसके लिए बिजनेस करते इसकी मदद से बिजनेस करते थे। फोब्स मैगजीन के मुताबिक न्यूयॉर्क के 26 अरबपतियों ने जोहरान ममदानी के खिलाफ भी कैंपेन चलाने के लिए मिलियंस ऑफ डॉलर्स लगाए हैं। उस वक्त जब उसे अपनी हिमायत के लिए एक भी बिलियनियर नहीं मिल रहा था। बिजनेस इंसाइडर ने तो पूरी लिस्ट पिक्चर्स के साथ शाया की है उन मेजर बिलियर्स के जिन्होंने आखिरी वक्त में डेस्पेरेट एफर्ट्स की और मिलियंस ऑफ डॉलर्स झोंक दिए कि न्यूयॉर्क में जोहान ममदानी को जीतने ना दिया जाए। इसने जब जनवरी में इसी साल शुरू में कैंपेन का आगाज किया था तो इसे सिर्फ एक फीसद इंडोर्समेंट मिली थी। मगर अगले माह इसने घरों में जाकर लोगों के साथ और युगांडा और श्रीलंका के लोगों के जो छोटे-छोटे होटल्स थे वहां जाकर लोगों के साथ चाय पीना शुरू की। गुफ्तगू शुरू की। गपशप लगाना शुरू किया माइक पकड़ कर। यहीं से इसकी कैंपेन का आगाज हुआ था। और इसी शहर से फिर इसे डेढ़ लाख वालंटियर्स भी अगले महीने तक एक या डेढ़ माह में मिल गए। जिन्होंने इसके लिए आम लोगों से फिर घर-घर जाकर फंड्स जमा किए। बल्कि अप्रैल में यानी सिर्फ तीन माह बाद इसके उसने एक फनी वीडियो भी फिर बनाई और उसको लोड किया अपने सोशल मीडिया पर और तंज करते हुए अपने मुखालफिन के लिए लिखा जो कि कह रहे थे कि ये कभी फंड जमा नहीं कर सकेगा। उनके लिए वीडियो बनाई और उसने उस वीडियो में कहा कि बस बस बहुत हो गया। मेरे पास अब बहुत पैसे आ चुके हैं। मेरे फंड्स जमा करने वाले बच्चों को चाहिए कि मजीद फंड्स जमा ना करें। यूं वो 1% से 50% तक आया और जीत गया। और सिर्फ वही नहीं जीता बल्कि इसकी जीत ने डेमोक्रेट्स गिरे हुए मरे हुए डेमोक्रेट्स को एक नया मोमेंटम भी दे दिया है। एक नया रास्ता भी कि उन्होंने अब मिलीनियल्स और जनरेशन जी को सोचने और समझने वालों वाले हिस्से को इस दोनों जनरेशंस के सोचने और समझने वाले हिस्से को इनके इंटेलेक्चुअल माइंड्स को सामने रखकर मुस्तकबिल की सियासत करनी है। आप स्वीडन की ग्रिटा थंबर की मिसाल याद रखें जो इसी जनरेशन से है और इसने भी इंटरनेशनल सिस्टम के खिलाफ रेजिस्टेंस की एक नाकाबिल बयान मिसाल कायम की है। वो भी यूरोप के यंग मोटर्स में एक बहुत बड़ा ट्रेंड लाई है। बहुत पॉपुलर है। इनफ्लुएंसरर है। आने वाली लीडरशिप इस ट्रेंड को नजरअंदाज यूरोप में भी नहीं कर सकती। और यकीन मानिए थर्ड वर्ल्ड में भी नहीं। इसे आप यूं ना समझे दोस्तों कि दुनिया अब सोशलिस्ट या कम्युनिस्ट होने की तरफ जा रही है। बल्कि यूं है कि सेंटर लेफ्ट और सेंटर राइट जिस तंगनाई में जिस नैरो कॉरिडोर में फंसा हुआ था वो कॉरिडोर वाइडन हो चुका है। वो फैल गया है। अब सेंटर लेफ्ट काफी लेफ्ट की तरफ जा चुका है और सेंटर राइट फार राइट के करीब चला गया है। वो अमकी सियासत जिस पर तंज हुआ करता था कि डेमोक्रेट्स और पब्लिक्स में इतना ही फर्क है जितना पेप्सी और कोका कोला में होता है। तो यह फर्क शायद अब बढ़ गया है कुछ जो आप ममदानी की पॉलिसीज में और डोनाल्ड ट्रंप के हिमायत याफ्ता यानी रिपब्लिकनंस के हिमायत याफ्ता मेगा मेसर्स की पॉलिसीज में साफ देखेंगे। वैसे यह लड़ाई अभी शुरू हुई है। डोन्ड ट्रंप बार-बार न्यूयॉर्कर्स को शहरियों को धमकियां दे रहे हैं कि मैं फंड्स बंद कर दूंगा। खैर मुमकिन है वो इन धमकियों पर अमल भी करें क्योंकि अगर फ्री बसेस देनी है तो उसके लिए फंड्स मरकज से ही लेना पड़ेंगे। डोनाल्ड ट्रंप परेशान है क्योंकि उनके फैमिली बिनेसेस का लॉन्ग टर्म बेनिफिट और रिपब्लिकन पार्टी के लिए अगले साल का मिड टर्म इलेक्शन बहुत अहम है। वो यही ट्रेंड रहा तो बुरी तरह हार जाएंगे क्योंकि उनके खिलाफ उनके अपोजिट मोमेंटम बन रहा है क्योंकि वो सिर्फ न्यूयॉर्क से थोड़ा हारे हैं। बल्कि वो 30 रियासतों में 30 मुकामात पर मुख्तलिफ तरह के इलेक्शंस थे जिनमें वो हारे हैं। तकरीबन क्लीन स्वीप हुआ है। उनके खिलाफ टॉप पोजीशंस डेमोक्रेट्स के पास अब तक की वोटिंग के मुताबिक रही है। जो जो रिजल्ट्स मैंने देखे हैं। करीब करीब यह डेमोक्रेट्स का क्लीन स्वीप है इन 30 इलेक्शंस में जो मुख्तलिफ दर्जों के थे। वर्जनिया में डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन मेयर को शिकस्त दे दी है। नायब गवर्नर के ओदे पर भी पहली बार मुस्लिम नायब नायब गवर्नर गजाला हाशमी मुंतखब हुई है। न्यू जर्सी में भी डेमोक्रेट गवर्नर दोबारा जीता है। सनसनाटी में डेमोक्रेट्स का आफताब रेवाल मेयर इ हुआ है। पेंसिलवनिया और कैलिफोर्निया में भी कई दूसरे टाइप के कॉन्टेस्ट्स में भी डेमोक्रेट्स ही को जीत मिली है। याद रखें इन सब मुकाबलों में इन सब कॉन्टेस्ट्स में आफताब परवाल की जीत बहुत अहम है। क्योंकि इसके मुकाबले में अमेरिकन वाइस प्रेसिडेंट जे डी वेंस का भाई था। उसका हाफ ब्रदर था। लेकिन इसकी चर्चा आपने ज्यादा इसलिए नहीं सुनी कि ये री इलेक्ट हुआ है। पहले भी यही मेयर था। मगर बात यह है कि जो मोमेंटम डोनल्ड ट्रंप की जीत से पूरी दुनिया में और खुसूसन अमेरिका में राइट को मिला था। इसकी कमर बहरहाल इस एक दिन में होने वाले मुख्तलिफ तरह के 30 इलेक्शंस में टूटी है। क्योंकि डोन्ड ट्रंप की जीत में डेमोक्रेट्स अपनी कई रियासतें और तमाम स्विंग स्टेट्स हार चुके थे। वो वो रियासतें भी जो वो अक्सर जीता करते थे। सो इस वक्त इनकी अपनी सीट्स भी दोबारा जीत लेना इनका वापस आने जैसा ही है। इस सबको देखकर दोस्तों यूं लगता है कि अमेरिकन पॉलिटिक्स में एक पैराडाइम शिफ्ट शुरू हो रहा है। जिससे लिबरल लेफ्ट विंग को एक नई जिंदगी मिली है। जिस तरह दुनिया में डोनल्ड ट्रंप और ईलॉन मस्क जैसे फॉर राइट के टॉप पोजीशंस पर आ जाने से राइट विंग को एक नया जोश मिला था और लगने लगा था कि लिबरल्स सोशलिस्ट और लेफ्ट लेनिंग माइंडसेट्स शायद किस्सा पारीना बनने लगे हैं जो कि जाहिर है दुरुस्त बात नहीं थी। वो अंदाजा भी अब साबित हो गया कि गलत था। क्रस फेलो जोहरान ममदानी को गिराने के लिए 26 बिलियन इयर्स के अलावा डोनल्ड ट्रंप और एलॉन मस्क ने जो खौफनाक मीडिया मुहिम चलाई थी के साथ उसे आखरी दिनों तक इन्होंने जारी रखा। एलॉन मस्क और उसकी एक्स टीम ने बैलेट बॉक्स ही को फ्रॉड करार देना शुरू किया और कहा कि इस पर दो मर्तबा जोहरान का नाम दर्ज है। हालांकि वहां दो पार्टीज के कैंडिडेट्स के नाम दर्ज थे। जोहरान डेमोक्रेट्स की तरफ से भी उम्मीदवार था और वर्किंग फैमिली की तरफ से भी और ये तरीका अमेरिका में सदियों से चला आ रहा है। याद रखें अमेरिकन डेमोक्रेसी की जो लेगसी है वो 250 साल पुरानी है। 10 20 साल 50 साल पुरानी है। इसके अलावा भी उसी बैलेट बॉक्स पर जहां जोहरान ममदानी का नाम दो मर्तबा था। रिपब्लिकन कैंडिडेट का इन्हीं की पार्टी के कैंडिडेट का नाम भी दो मर्तबा ही दर्ज था। क्योंकि उसे भी दो पार्टीज ने पार्टी की तरफ से नॉमिनेट हुआ था। एक रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से और दूसरा प्रोटेक्ट एनिमल्स पार्टी की तरफ से। ममदानी के खिलाफ इसी तरह के जाती हरबे उसको एंटीसेमाइट कहना उसके इस्लाम पे उसके मुस्लिम होने पे इमीग्रेंट होने पे मुसलसल एक कैंपेन चलती रही। यहां तक कि जैसे ही ममदानी की जीत का ऐलान हुआ न्यूज़ पर फ्लोरिडा गवर्नर आकर चिल्लाने लगे कि तमाम के तमाम न्यूयॉर्कर्स न्यूयॉर्क छोड़ने लगे हैं। जैसे कि वर्जीनिया और न्यू जर्सी के तमाम शहरी ये स्टेट्स छोड़कर भी कहीं और जा रहे हैं। उन्होंने गालिबन 3 मिलियन से ऊपर का फिगर भी दिया कुछ बरसों का। जाहिर है वो तंज कर रहे थे। इसी तरह डोनाल्ड ट्रंप ने चार अल्फाज़ अपने जाती ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किए इस दौरान ममदानी की जीत पर कि अब खेल शुरू हुआ। यह एक धमकी थी और उसका जवाब फिर मेयर इलेक्ट ममदानी ने भी अपनी फातिहाना तकरीर में चार अल्फाज ही में दिया और कहा कि डोनल्ड ट्रंप मुझे इल्म है तुम मुझे सुन रहे हो। मेरे पास तुम्हारे लिए चार अल्फाज हैं। टर्न द वॉल्यूम अप। आवाज थोड़ी ऊंची कर लो। जरा कान खोल कर सुन लो मैं क्या कहने जा रहा हूं। जोहरान ने अपनी विक्ट्री स्पीच में डोन्ड ट्रंप का बार-बार नाम लेकर मुखातिब किया और ट्रंप पॉलिसीज को रिवर्स करने का वापस करने का ऐलान किया। उसने वादा किया कि हम ट्रंप ही का नहीं बल्कि आने वाले ट्रंप्स का रास्ता भी रोकेंगे। न्यूयॉर्क सिटी इमीग्रेंट्स का शहर था। इमीग्रेंट्स का शहर है और से गवर्न करने वाला भी इमीग्रेंट ही है। मुहाजर ही है। जोहरान ममदानी ने कहा कि अगर ट्रंप ने मेरे शहर में इमीग्रेंट्स के खिलाफ एक्शन लेने की कोशिश की तो अब उसको पूरे शहर से लड़ना होगा। अब न्यूयॉर्क वो शहर नहीं होगा जहां आप इस्लामोफोबिया फैलाकर ही इलेक्शन जीत सकते हैं। आज न्यूयॉर्क ने तब्दीली का मैंडेट दे दिया है। हमने एक सियासी बादशाहत का तख्ता उलट दिया है। फिर जोहरान ने न्यूयॉर्क में रहने वाली मुख्तलिफ एथनिसिटीज जैसा कि यमनियों, मेक्सिकन, सनीगा के लोगों, उजबक्स और दीगर के नाम लेकर कहा कि यह शहर तुम सबका है। इसके अलावा उसने 20 लाख लोगों के रेंट मुंजमिद करने, बसों के किराए खत्म करने और शहर के तमाम घरानों को चाइल्ड केयर देने का वादा भी दोहराया जो कि उसकी कैंपेन का हिस्सा था। जैसा कि हम आपको बता चुके हैं। उसने यह भी वादा दोहराया कि ट्रंप की तरफ से बरतरफ किए गए ट्रांसजेंडरर्स और सियाफ खवातीन के बारे में भी कुछ उनके लिए भी कुछ किया जाएगा। शायद बहाल करने की कोशिश उनकी बात वो कर रहे थे। उसने न्यूयॉर्क के यहूदियों से भी वादा किया कि एंटीसेमिटिज्म को रोकने के लिए वो उनके साथ खड़ा है और उनके फंड्स भी बढ़ाएगा और उसमें उनकी मदद करेगा। फर्स्ट जनवरी को अगले साल के पहले दिन जोरान ममदानी का हलफ होगा और वो फिर आइंदा चार साल के लिए अमेरिका का पहला मुस्लिम मेयर होगा और कुल मिलाकर 111वा इन चार बरसों में डोनल्ड ट्रंप को तीन साल इससे जंग करना पड़ेगी। उसको मौका मिलेगा और डेमोक्रेट्स के पास वापसी के लिए अपने नए मॉडल के लिए इससे अच्छा स्टार्ट और टेस्ट भी नहीं हो सकता कि वो न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी को कामयाब करके पूरे अमेरिका से अगले तीन साल के बाद प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में वोट्स का मुतालबा करें। हम पाकिस्तानी हमारा मुल्क इससे बहुत कुछ सीख सकता है। पाकिस्तान इससे यह सीख सकता है कि हमें भी अपने सिस्टम्स पर काम करना है ताकि शख्सियात आती जाती रहे और हमारा मुल्क वो जगह बने जहां हमेशा बेहतरीन लोग चाहे वो किसी भी मजहब से हो, फिरके से हो, रंग नसल या कौम से हो वही टॉप पोजीशंस पर आ सके। हमें ऐसे सिस्टम पर मेहनत करनी है। हमें बायस ऐसे सिस्टम के लिए दिखाना है ना कि शख्सियात के लिए। हमें ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए अपने मुल्क का। उसके लिए कोशिश करनी चाहिए जो ग्रास रूट लेवल तक वर्क करे और खुद को रिफाइन करने की भी सलाहियत रखता हो ताकि हम शख्सियात के मोहताज ना रहे ताकि हम नजरियात के मोहताज ना रहे। शुक्रिया। [संगीत]

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